परमेश्वर की प्यारी संतान, मैं हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के सामर्थी नाम में आप सभी का अभिवादन करती हूँ। आज का वादा व्यवस्थाविवरण 8:18 से लिया गया है: "तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य देता है।'' यह वचन हमें याद दिलाता है कि हमारे जीवन की हर आशीष, हर अवसर और हर सफलता प्रभु की ओर से आती है।
हम अपने जीवन में परमेश्वर की शक्ति और आशीषों का अनुभव कैसे कर सकते हैं? इसका उत्तर उसके साथ हमारे रिश्ते में मिलता है। जब हम प्रभु के साथ जुड़े होते हैं, तो हम उसकी भरपूर आशीषों के भागीदार बनते हैं। यीशु स्वयं हमारे लिए उत्तम उदाहरण हैं। यूहन्ना 10:30 में, उसने कहा, "मैं और पिता एक हैं।" जिस तरह यीशु पिता के साथ पूरी एकता में रहे, वैसे ही हमें भी परमेश्वर के करीब चलने के लिए बुलाया गया है।
हम उनसे कैसे जुड़ सकते हैं? परमेश्वर के वचन को पढ़कर, उसकी आज्ञाओं का पालन करके, यीशु मसीह पर मज़बूती से भरोसा रखकर और पूरे दिल से उसे खोजना चाहिए। जब हम ऐसा करते हैं, तो परमेश्वर के साथ हमारा रिश्ता और मज़बूत होता है। वह हमें जो पहला सबक सिखाते हैं, उनमें से एक है प्रभु का भय—यानी ऐसा आदर और सम्मान जो हमें उसके दिखाए रास्ते पर चलने में मदद करता है।
भजन संहिता 144:15 में कहा गया है, "धन्य हैं वे लोग जिनका परमेश्वर प्रभु है।" यह आशीष तब सच होती है जब हम पूरे दिल से उसके पीछे चलने का फ़ैसला करते हैं। बाइबल हमें याकूब की पत्नियों, लिया: और राहेल के ज़रिए एक ज़रूरी उदाहरण देती है। लिया: ने हमेशा अपनी ज़िंदगी में परमेश्वर की मौजूदगी को माना और दिल से उसकी तारीफ़ की। लेकिन राहेल ने एक बड़ी गलती की। हालाँकि वह परमेश्वर के साथ वाचा से जुड़े परिवार का हिस्सा थी, फिर भी उसने चुपके से अपने पिता की मूर्तियाँ चुरा लीं। जिस प्रभु की सेवा याकूब करता था, उस पर पूरी तरह भरोसा करने और उसके पीछे चलने के बजाय, उसने ऐसी चीज़ों को थामे रखा जिनसे परमेश्वर नाराज़ होते थे। नतीजा यह हुआ कि राहेल 'प्रतिज्ञा की हुई भूमि' तक नहीं पहुँच पाई और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। लेकिन लिया: परमेश्वर के दिखाए रास्ते पर चलती रही और मरने के बाद भी उसे सम्मान मिला। उसे अपने पति के बगल में दफ़नाया गया और उसे आशीष और याद किए जाने का एक खास स्थान मिला।
आज हमारे लिए कितना ज़बरदस्त सबक है! परमेश्वर हमसे पूरी भक्ति चाहता है। जब हम अपने दिलों से हर मूर्ति को हटा देते हैं और सिर्फ़ उसी को खोजने का फ़ैसला करते हैं, तो उसकी आशीषें हमारे साथ होती हैं। आइए हम लिया: की मिसाल से सीखें और ज़िंदगी के हर दौर में प्रभु के प्रति वफ़ादार रहें। आज, परमेश्वर के साथ क़रीब से चलने, उसके वचन को मानने और पूरे दिल से उसे खोजने का फ़ैसला करें। जब आप ऐसा करेंगे, तो वह आपकी अगुवाई करेगा, आपको आशीष देगा और आपको अपनी बेहतरीन योजना में स्थापित करेगा।
प्रार्थना:
स्वर्गीय पिता, मैं आपका धन्यवाद करती हूँ कि मेरी ताकत सिर्फ़ आप से ही आती है। हर लड़ाई में आप ही मेरी ढाल हैं । आप मेरे आगे चलता है और मेरे रास्ते को सुरक्षित बनाता है। आप मुझे भरोसा करने और डगमगाने न देने में मदद करता है। आप मेरी आत्मा को शांत देते हैं और मेरी उम्मीद को आप पर टिकाए रखती है। आप मुझे जीत हासिल करने के लिए अपनी शक्ति और अधिकार से भरते हैं । आप मुझे हर डर और दुश्मन के हर काम को दूर करते हैं। आप अपनी महिमा के लिए मुझे जीत की ओर ले जाते हैं। यीशु के शक्तिशाली नाम में, मैं प्रार्थना करती हूँ। आमीन।

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